नज़्म 1

 

शेर 20

है कामयाबी-ए-मर्दां में हाथ औरत का

मगर तू एक ही औरत पे इंहिसार कर

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वो तीस साल से है फ़क़त बीस साल की

चेहरे पे चुकी है बुज़ुर्गी जमाल की

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मैं एक बोरी में लाया हूँ भर के मूँग-फली

किसी के साथ दिसम्बर की रात काटनी है

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दे रहे हैं इस लिए जंगल में धरना जानवर

एक चूहे को रिहाइश के लिए बिल चाहिए

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वे बालों में कलर लगवा चुका है

ये धोका पाँच सौ में खा चुका है

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हास्य 2

 

क़ितआ 3