बासित अली राजा के शेर
एक ही शख़्स गवारा है ज़मीं पर मुझ को
वो भी आवाज़ लगाए तो पलटता नहीं हूँ
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
मुझ से मिलना है तो उस शख़्स के हमराह मिलें
जो मिरे सामने तो आप की ता'ज़ीम करे
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
ख़ामुशी है हर तरफ़ हर जा मुसलसल ख़ामुशी
ख़ामुशी ऐसी कि ख़ुद को सुन नहीं पाता हूँ मैं
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
ऐसी वहशत है मिरे दोस्त तुम्हारी तस्वीर
आज दीवार से गिरते ही जला दी मैं ने
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड