चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी के शेर
हाए कितना लतीफ़ है वो ग़म
जिस ने बख़्शा है ज़िंदगी का शुऊर
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टैग : ग़म
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कभी किसी का तजस्सुस कभी ख़ुद अपनी तलाश
अजीब दिल है हमेशा सफ़र में रहता है
तमाम शहर को है जिस पे नाज़ ऐ 'जौहर'
इक ऐसा शख़्स हमारे नगर में रहता है