ग़ज़नफ़र हाशमी के शेर
अजब तरह का अधूरापन है मिरे बयाँ में
सो मेरा क़िस्सा कहीं सुनाने में रह गया है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere