ग़ुलाम हैदर का परिचय
पहचान: बाल साहित्यकार और अनुवादक
सैयद ग़ुलाम हैदर का जन्म 1 जनवरी 1937 को अमरोहा (उत्तर प्रदेश) के एक धार्मिक और विद्वतापूर्ण परिवार में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा मेरठ के प्रसिद्ध मदरसा मंसबिया में प्राप्त की। बाद में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली से मैट्रिक तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. किया। उन्होंने भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में रिसर्च ऑफिसर के रूप में कार्य किया और 1988 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर स्वयं को पूर्णतः साहित्यिक गतिविधियों के लिए समर्पित कर दिया।
ग़ुलाम हैदर उर्दू के प्रमुख बाल साहित्यकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1960 के दशक में बच्चों के लिए लिखना शुरू किया और उनकी पहली पुस्तक "पैसे की कहानी" 1973 में प्रकाशित हुई। उन्होंने बाल साहित्य पर सत्रह से अधिक पुस्तकें लिखीं तथा साहित्य, शिक्षा और इतिहास से जुड़े विषयों पर भी अनेक पुस्तकें और अनुवाद प्रस्तुत किए।
उन्होंने बाल साहित्य को योजनाबद्ध और शोधपरक दृष्टि से विकसित किया। सभ्यता, सामाजिक एवं आर्थिक विकास, विज्ञान, इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन जैसे विषयों को बच्चों की समझ के अनुरूप रोचक शैली में प्रस्तुत किया। उनकी प्रमुख कृतियों में "पैसे की कहानी", "ख़त की कहानी", "बैंक की कहानी", "अख़बार की कहानी", "आज़ादी की कहानी", "ग़ार से झोंपड़ी तक", "पगडंडी: जंगल से खेत तक", "पेड़ पेड़ मेरा दाना दे", "आख़िरी चोरी", "जामिया की कहानी जामिया वालों की ज़ुबानी", "मेरी दो दर्सगाहें", "रौ में है रक्श-ए-उमर" तथा आत्मकथा "अपनी दुनिया आप पैदा कर" शामिल हैं।
बाल साहित्य के विकास के लिए उन्होंने 1984 में "बच्चों का अदबी ट्रस्ट" स्थापित किया, जिसके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन, सेमिनार, कार्यशालाएँ और अन्य साहित्यिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस संस्था ने उर्दू में बच्चों की अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों के प्रकाशन और अनुवाद को बढ़ावा दिया।
2010 में साहित्य अकादेमी ने उनके कहानी-संग्रह "आख़िरी चोरी" को बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया। वे उर्दू के पहले लेखक हैं जिन्हें बाल साहित्य के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त उन्हें उर्दू अकादमी दिल्ली, हरियाणा उर्दू अकादमी, एसोसिएशन ऑफ राइटर्स एंड इलस्ट्रेटर्स के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2012) तथा "फ़ख्र-ए-अमरोहा" (2014) सहित अनेक सम्मानों से नवाज़ा गया।
उर्दू, अंग्रेज़ी, हिंदी और फ़ारसी भाषाओं पर अधिकार रखने वाले ग़ुलाम हैदर की रचनाओं की विशेषता उनकी सरल, आकर्षक और ज्ञानवर्धक शैली है, जिसके माध्यम से वे बच्चों में जिज्ञासा, अध्ययन-रुचि, नैतिक चेतना और यथार्थवादी दृष्टि विकसित करते हैं। बाल साहित्य के क्षेत्र में उनकी सेवाएँ एक संस्था का दर्जा रखती हैं।