Gulzar's Photo'

सम्पूर्ण सिंह/प्रमुख फि़ल्म निर्माता और निर्देशक, फि़ल्म गीतकार और कहानीकार/मिर्ज़ा ग़ालिब पर टीवी सीरियल के लिए प्रसिद्ध/साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त

सम्पूर्ण सिंह/प्रमुख फि़ल्म निर्माता और निर्देशक, फि़ल्म गीतकार और कहानीकार/मिर्ज़ा ग़ालिब पर टीवी सीरियल के लिए प्रसिद्ध/साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त

गुलज़ार के वीडियो

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Gulzar - Mushaira - Majlise Auditorium - Poems - By Gulzar

गुलज़ार

Gulzar Nazm In His Own Voice | 41 Nazm Jukebox Collection written and recited by Gulzar Saab

गुलज़ार

gulzar poetry ,, pyar kabhi ik tarfa hota hai na hoga

गुलज़ार

Poet Gulzar recites his poems

गुलज़ार

ग़ालिब

बल्ली-मारां के मोहल्ले की वो पेचीदा दलीलों की सी गलियाँ गुलज़ार

Din Kuchh Aise Guzaarta Hai Koi | Gulzar Nazm In His Own Voice

गुलज़ार

अकेले

किस क़दर सीधा, सहल, साफ़ है रस्ता देखो गुलज़ार

आदत

साँस लेना भी कैसी आदत है गुलज़ार

ओस पड़ी थी रात बहुत और कोहरा था गर्माइश पर

गुलज़ार

किताबें

किताबें झाँकती हैं बंद अलमारी के शीशों से गुलज़ार

ख़ुद-कुशी

बस इक लम्हे का झगड़ा था गुलज़ार

दस्तक

सुब्ह सुब्ह इक ख़्वाब की दस्तक पर दरवाज़ा खोला' देखा गुलज़ार

बे-ख़ुदी

दो सौंधे सौंधे से जिस्म जिस वक़्त गुलज़ार

बीते रिश्ते तलाश करती है

गुलज़ार

रूह देखी है कभी!

रूह देखी है? गुलज़ार

लिबास

मेरे कपड़ों में टंगा है गुलज़ार

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A Journey of Thoughts - with Gulzar

Guftagoo with Gulzar

Gulzar in conversation with Zamarrud Mughal for Rekhta.org

Sampooran Singh Kalra known popular by his pen name Gulzar is an Indian poet, Lyricist and Film director. Here are some of his excerpts interview with Zamarrud Mughal for Rekhta.org गुलज़ार

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khaali haath shaam aayi hai

khaali haath shaam aayi hai आशा भोसले

आँखों में जल रहा है प बुझता नहीं धुआँ

आँखों में जल रहा है प बुझता नहीं धुआँ अज्ञात

एक पर्वाज़ दिखाई दी है

एक पर्वाज़ दिखाई दी है जगजीत सिंह

कहीं तो गर्द उड़े या कहीं ग़ुबार दिखे

कहीं तो गर्द उड़े या कहीं ग़ुबार दिखे भूपिंदर सिंह

कोई अटका हुआ है पल शायद

कोई अटका हुआ है पल शायद ग़ुलाम अली

कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है

कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है अज्ञात

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में गुलज़ार

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में ग़ुलाम अली

जब भी आँखों में अश्क भर आए

जब भी आँखों में अश्क भर आए ग़ुलाम अली

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा जगजीत सिंह

दर्द हल्का है साँस भारी है

दर्द हल्का है साँस भारी है जगजीत सिंह

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जगजीत सिंह

फूलों की तरह लब खोल कभी

फूलों की तरह लब खोल कभी जगजीत सिंह

रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले

रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले लता मंगेशकर

वो ख़त के पुर्ज़े उड़ा रहा था

वो ख़त के पुर्ज़े उड़ा रहा था जगजीत सिंह

शाम से आँख में नमी सी है

शाम से आँख में नमी सी है आशा भोसले

शाम से आँख में नमी सी है

शाम से आँख में नमी सी है गुलज़ार

शाम से आज साँस भारी है

शाम से आज साँस भारी है गुलज़ार

शाम से आज साँस भारी है

शाम से आज साँस भारी है ग़ुलाम अली

सब्र हर बार इख़्तियार किया

सब्र हर बार इख़्तियार किया अली रज़ा

सहमा सहमा डरा सा रहता है

सहमा सहमा डरा सा रहता है ग़ुलाम अली

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते जगजीत सिंह

शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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