हान शान आठवीं और नौवीं सदी ईस्वी का एक चीनी कवि है। वो पहले अपने भाइयों के साथ मिलकर खेती-बाड़ी करता था। फिर उनसे कुछ मनमुटाव हो गया और वह अपनी पत्नी और परिवार को छोड़कर इधर-उधर भटकता रहा। अंततः वह संसार-त्यागी होकर हान शान (अर्थात् "ठंडा पर्वत") पर रहने लगा और इसी नाम से प्रसिद्ध हुआ। ठंडा पर्वत उसकी कविताओं में केवल स्थान के रूप में नहीं बल्कि एक आंतरिक स्थिति, शांति और वैराग्य के प्रतीक के रूप में भी आया है।