इक़बाल उमर के शेर
तमाम दिन मुझे सूरज के साथ चलना था
मिरे सबब से मिरे हम-सफ़र पे धूप रही
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
जिन पर निसार नक़्द-ए-सुकूँ नक़्द-ए-जाँ किया
उन से मिले तो ऐसी नदामत हुई कि बस
-
टैग : शर्म
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
दुनिया ग़रीब जान के हँसती थी 'मीर' पर
'इक़बाल' मुझ पे ऐसे ये दुनिया हँसी कि बस