जमील जालिबी का परिचय
उपनाम : 'जमील जालिबी'
मूल नाम : मोहम्मद जमील ख़ान
जन्म : 12 Jun 1929 | अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
निधन : 18 Apr 2019 | कराची, सिंध
LCCN :n82118665
पहचान: प्रसिद्ध शोधकर्ता, साहित्यिक इतिहासकार, आलोचक, भाषाविद्, कराची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, मुक़्तदरा क़ौमी ज़बान (वर्तमान नाम: इदारा फ़रोग़-ए-क़ौमी ज़बान) के अध्यक्ष और उर्दू लुग़त बोर्ड के अध्यक्ष
जमील जालिबी (वास्तविक नाम: मुहम्मद जमील ख़ान) उर्दू साहित्य की उन महान हस्तियों में से हैं जिन्होंने शोध, आलोचना और साहित्यिक इतिहास लेखन के क्षेत्र में असाधारण सेवाएँ प्रदान कीं। आपका जन्म 12 जून 1929 को अलीगढ़ में हुआ (सरकारी अभिलेखों में 1 जुलाई दर्ज है)। आपके पिता मुहम्मद इब्राहीम ख़ान और दादा मुहम्मद इस्माईल ख़ान थे, जबकि माता का नाम अकबरी बेगम था। आपका संबंध यूसुफ़ज़ई पठान परिवार से था, और आपके पूर्वज स्वात से हिजरत कर के भारत आए थे।
प्रारंभिक शिक्षा सहारनपुर में प्राप्त की। इसके बाद मेरठ कॉलेज से एफ.ए. और बी.ए. किया। आगे चलकर सिंध विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी और उर्दू में एम.ए. किया, एल.एल.बी. की डिग्री प्राप्त की, और उसी विश्वविद्यालय से पीएच.डी. (1971) तथा डी.लिट् (1976) की उच्च उपाधियाँ हासिल कीं।
व्यावसायिक जीवन की शुरुआत एक हेडमास्टर के रूप में हुई। बाद में प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से आयकर विभाग से जुड़े और कमिश्नर के पद तक पहुँचे। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय से संबद्ध हुए और कराची विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर भी कार्य किया।
जमील जालिबी की शैक्षिक और साहित्यिक सेवाएँ अत्यंत व्यापक हैं। उनकी प्रसिद्ध कृति "तारीख़-ए-अदब-ए-उर्दू" उर्दू साहित्य के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और प्रामाणिक पुस्तकों में गिनी जाती है, जिसमें प्राचीन काल से लेकर अठारहवीं शताब्दी तक का शोधपरक और वस्तुनिष्ठ विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त "अदब, कल्चर और मसाइल", "तनक़ीद और तजुर्बा", "कदीम उर्दू की लुग़त", "पाकिस्तानी कल्चर: क़ौमी कल्चर का मसला" जैसी महत्वपूर्ण कृतियाँ भी उनकी देन हैं।
शोध के क्षेत्र में उन्होंने दकनी साहित्य पर भी उल्लेखनीय कार्य किया, विशेषकर निज़ामी दकनी की मसनवी "कदम राव पदम राव" पर उनका कार्य बुनियादी माना जाता है। अनुवादों में "अरस्तू से एलियट तक", "एलियट के मज़ामीन" और "जानवरिस्तान" उल्लेखनीय हैं।
जमील जालिबी एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक साथ शोधकर्ता, इतिहासकार और आलोचक थे, लेकिन उनकी प्रमुख पहचान एक महान शोधकर्ता और साहित्यिक इतिहासकार के रूप में है। उन्होंने उर्दू में साहित्यिक इतिहास लेखन को नई दिशा दी और शोध के मानकों को ऊँचा किया।
निधन: 18 अप्रैल 2019 को कराची में उनका निधन हुआ।
सहायक लिंक : | https://en.wikipedia.org/wiki/Jamil_Jalibi | http://tns.thenews.com.pk/individual-surpassed-institutions/#.XMgFWmgzbIW
प्राधिकरण नियंत्रण :लाइब्रेरी ऑफ कॉंग्रेस नियंत्रण संख्या : n82118665