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जमील यूसुफ़

1939 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 19

शेर 6

अब तो तेरे हुस्न की हर अंजुमन में धूम है

जिस ने मेरा हाल देखा तेरा दीवाना हुआ

दिल जहाँ ले जाए दिल के साथ जाना चाहिए

इस से बढ़ कर और कोई रहनुमा होता नहीं

तेरी दूरी भी है मुश्किल तिरी क़ुर्बत भी मुहाल

किस क़दर तू ने मिरी जान सताया है मुझे

तेरी दुनिया में तिरे हुस्न का शैदाई हूँ

ख़ुदा मुझ को गुनहगार समझा जाए

ख़ुदा तू ही बे-मिसाल नहीं

मैं भी हूँ काएनात में तन्हा

पुस्तकें 3

Ghazaal, Jameel Yusuf Ki Muntakhab Ghazlen

 

1980

Ghazal

 

1985

Jal Pari Ke Des Mein

 

1996