Jamuna Parsad Rahi's Photo'

जमुना प्रसाद राही

अलीगढ़, भारत

ग़ज़ल

कुछ तो सच्चाई के शहकार नज़र में आते

नोमान शौक़

कश्तियाँ डूब रही हैं कोई साहिल लाओ

नोमान शौक़

कोहसार-ए-तग़ाफ़ुल को सदा काट रही है

नोमान शौक़

ख़ूँ-गिरफ़्ता हो तो ख़ंजर का बदन दुखता है

नोमान शौक़

गाँव से गुज़रेगा और मिट्टी के घर ले जाएगा

नोमान शौक़

जंग में परवर-दिगार-ए-शब का क्या क़िस्सा हुआ

नोमान शौक़

जादा-ए-ज़ीस्त में तनवीर-ए-सहर आने तक

नोमान शौक़

तस्वीर का हर रंग नज़र में है

नोमान शौक़

दयार-ए-संग में रह कर भी शीशागर था मैं

नोमान शौक़

समंद-ए-ख़्वाब वहाँ छोड़ कर रवाना हुआ

नोमान शौक़

हवा ने दोश से झटका तो आब पर ठहरा

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI