Jamuna Parsad Rahi's Photo'

जमुना प्रसाद राही

अलीगढ़, भारत

ग़ज़ल 13

शेर 13

हर रूह पस-ए-पर्दा-ए-तरतीब-ए-अनासिर

ना-कर्दा गुनाहों की सज़ा काट रही है

अमाँ किसे थी मिरे साए में जो रुकता कोई

ख़ुद अपनी आग में जलता हुआ शजर था मैं

इक रात है फैली हुई सदियों पर

हर लम्हा अंधेरों के असर में है

ई-पुस्तक 2

Bazgasht-e-Ghalib

 

2016

Safarguzar

 

2012

 

ऑडियो 11

कुछ तो सच्चाई के शहकार नज़र में आते

कश्तियाँ डूब रही हैं कोई साहिल लाओ

कोहसार-ए-तग़ाफ़ुल को सदा काट रही है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

और देखिए

"अलीगढ़" के और शायर

  • मुईद रशीदी मुईद रशीदी
  • सिराज अजमली सिराज अजमली
  • ज़ाहिदा ज़ैदी ज़ाहिदा ज़ैदी
  • शोला अलीगढ़ी शोला अलीगढ़ी
  • दानिश अलीगढ़ी दानिश अलीगढ़ी
  • सय्यद अमीन अशरफ़ सय्यद अमीन अशरफ़
  • वफ़ा नक़वी वफ़ा नक़वी
  • मुईन अहसन जज़्बी मुईन अहसन जज़्बी
  • मंज़ूर हाशमी मंज़ूर हाशमी
  • आल-ए-अहमद सूरूर आल-ए-अहमद सूरूर

Added to your favorites

Removed from your favorites