Syed Amin Ashraf's Photo'

सय्यद अमीन अशरफ़

1931 | अलीगढ़, भारत

अग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात।

अग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात।

सय्यद अमीन अशरफ़

ग़ज़ल 57

अशआर 15

है ता-हद्द-ए-इम्काँ कोई बस्ती बयाबाँ

आँखों में कोई ख़्वाब दिखाई नहीं देता

इक चाँद है आवारा-ओ-बेताब फ़लक-ताब

इक चाँद है आसूदगी-ए-हिज्र का मारा

लज़्ज़त-ए-दीद ख़ुदा जाने कहाँ ले जाए

आँख होती है तो होता नहीं क़ाबू दिल पर

किसी से इश्क़ हो जाने को अफ़्साना नहीं कहते

कि अफ़्साने मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार होते हैं

  • शेयर कीजिए

हल्क़ा-ए-शाम-ओ-सहर से नहीं जाने वाला

दर्द इस दीदा-ए-तर से नहीं जाने वाला

पुस्तकें 8

 

ऑडियो 4

किसी ख़याल की रौ में था मुस्कुराते हुए

पेच-दर-पेच सवालात में उलझे हुए हैं

मुनव्वर और मुबहम इस्तिआरे देख लेता हूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

"अलीगढ़" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए