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सय्यद अमीन अशरफ़

1931 | अलीगढ़, भारत

अग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात।

अग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात।

ग़ज़ल 57

शेर 15

इक चाँद है आवारा-ओ-बेताब फ़लक-ताब

इक चाँद है आसूदगी-ए-हिज्र का मारा

है ता-हद्द-ए-इम्काँ कोई बस्ती बयाबाँ

आँखों में कोई ख़्वाब दिखाई नहीं देता

इस तरह चश्म-ए-नीम-वा ग़ाफ़िल भी थी बेदार भी

जैसे नशा हो रात का या सुब्ह का तड़का हुआ

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ई-पुस्तक 5

बरग-ओ-बार

 

2012

Jada-e-Shab

 

2012

Jada-e-Shab

 

2000

Qafas-e-Rang

 

2011

अलीगढ़ मैगज़ीन

Salnama

1961

 

ऑडियो 4

किसी ख़याल की रौ में था मुस्कुराते हुए

पेच-दर-पेच सवालात में उलझे हुए हैं

मुनव्वर और मुबहम इस्तिआरे देख लेता हूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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