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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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करन बेदी के शेर

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हर एक शख़्स में उस को तलाशता हूँ मैं

वो मुझ को अपना तलब-गार कर के छोड़ गया

ता-'उम्र मुझ को कोई सहारा मिल सका

आँसू निकल पड़े हैं 'अज़ादार देख कर

मुझ को लगा वो सुन रहा है ग़ौर से मगर

बैठा हुआ था सामने दीवार की तरह

बुराई करना 'आदत में नहीं है

वगरना ख़ूबी बतलाते तुम्हारी

बुराई करना 'आदत में नहीं है

वगरना ख़ूबी बतलाते तुम्हारी

हम से पहले भी थे इस राह पे चलने वाले

अब यही सोच के रुकते हैं यहाँ दूसरे लोग

जुदा हो के तो हम मरे ही नहीं

कहाँ हम को मर कर जुदा होना था

सब बेचने में ही लगे हैं कुछ कुछ यहाँ

दुनिया दिखाई देती है बाज़ार की तरह

हर एक शख़्स में उस को तलाशता हूँ मैं

वो मुझ को अपना तलबगार कर के छोड़ गया

कुल्हाड़ी पैर पे अपने ही मार लेते हैं

शजर को काट के साया तलाश करते हैं

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