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ख़ान आरज़ू सिराजुद्दीन अली

1688 - 1756 | दिल्ली, भारत

भाषाविद्, मीर तक़ी मीर और मीर दर्द के उस्ताद

भाषाविद्, मीर तक़ी मीर और मीर दर्द के उस्ताद

ग़ज़ल

फ़लक ने रंज तीर-ए-आह से मेरे ज़ि-बस खेंचा

नोमान शौक़

हर सुब्ह आवता है तेरी बराबरी को

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI