noImage

ख़ान आरज़ू सिराजुद्दीन अली

1688 - 1756 | दिल्ली, भारत

भाषाविद्, मीर तक़ी मीर और मीर दर्द के उस्ताद

भाषाविद्, मीर तक़ी मीर और मीर दर्द के उस्ताद

अबस दिल बे-कसी पे अपनी अपनी हर वक़्त रोता है

कर ग़म दिवाने इश्क़ में ऐसा ही होता है

जान तुझ पर कुछ ए'तिमाद नहीं

ज़िंदगानी का क्या भरोसा है