कुंवर एजाज़ राजा के शेर
अपनी ख़्वाहिश में जो बस गए हैं वो दीवार-ओ-दर छोड़ दें
धूप आँखों में चुभने लगी है तो क्या हम सफ़र छोड़ दें
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere