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लाला मौजी राम मौजी

1789

शेर 2

दिल के आईने में है तस्वीर-ए-यार

जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ली

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वाँ हिना-बंदी थी और ज़ुल्फ़ को सुलझाना था

याँ परेशानी थी और ख़ून-ए-जिगर खाना था

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क़ितआ 1