Mahshar Badayuni's Photo'

महशर बदायुनी

1922 - 1994 | कराची, पाकिस्तान

महशर बदायुनी के शेर

अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला

जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा

जिस के लिए बच्चा रोया था और पोंछे थे आँसू बाबा ने

वो बच्चा अब भी ज़िंदा है वो महँगा खिलौना टूट गया

हम को भी ख़ुश-नुमा नज़र आई है ज़िंदगी

जैसे सराब दूर से दरिया दिखाई दे

हर पत्ती बोझल हो के गिरी सब शाख़ें झुक कर टूट गईं

उस बारिश ही से फ़स्ल उजड़ी जिस बारिश से तय्यार हुई

मैं इतनी रौशनी फैला चुका हूँ

कि बुझ भी जाऊँ तो अब ग़म नहीं है

अभी सर का लहू थमने पाया

उधर से एक पत्थर और आया

करे दरिया पुल मिस्मार मेरे

अभी कुछ लोग हैं उस पार मेरे