ग़ज़ल 6

शेर 4

रात भी चाँद भी समुंदर भी

मिल गए कितने ग़म-गुसार मुझे

ज़रा ठहरो कि पढ़ लूँ क्या लिखा मौसम की बारिश ने

मिरी दीवार पर लिखती रही है दास्ताँ वो भी

करम के बाब में अपनों से इब्तिदा किया कर

ज़रा सी बात पे दिल को यूँ बुरा किया कर

वीडियो 7

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
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मजीद अख़्तर

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