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मालिकज़ादा जावेद

नोएडा, भारत

प्रमुख लोकप्रिय शायर

प्रमुख लोकप्रिय शायर

मालिकज़ादा जावेद

ग़ज़ल 4

 

शेर 4

जल गए फिर से कुछ हसीं रिश्ते

तंज़िया गुफ़्तुगू की भट्टी में

ज़िंदगी एक कहानी के सिवा कुछ भी नहीं

लोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं

मियाँ उस शख़्स से होशियार रहना

सभी से झुक के जो मिलता बहुत है

कम-उम्री में सुनते हैं

मर जाते हैं अच्छे लोग

पुस्तकें 6

Khandar Mein Charagh

 

 

Shajar Shajar Chhaon

 

 

Zulf Mein Uljhi Dhoop

 

2008

Shumara Number-001

2018

Shumara Number-088

2017

Shumara Number-091

2018

 

वीडियो 11

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Apnaiyat tameez mohabbat nahi mili

Malikzada Jawed is the son of eminet poet, orator, Malik Zada Manzoor. Jawed poetry/articles usually get published in various literary magazines. He has his own diction and style that has its own charm. मालिकज़ादा जावेद

Hawa ho tez to shikwa nahi kiya jata

Malikzada Jawed is the son of eminet poet, orator, Malik Zada Manzoor. Jawed poetry/articles usually get published in various literary magazines. He has his own diction and style that has its own charm. मालिकज़ादा जावेद

Koi chehra ho janta hu main

Malikzada Jawed is the son of eminet poet, orator, Malik Zada Manzoor. Jawed poetry/articles usually get published in various literary magazines. He has his own diction and style that has its own charm. मालिकज़ादा जावेद

Mareez humko dawaye batane lagte hain

Malikzada Jawed is the son of eminet poet, orator, Malik Zada Manzoor. Jawed poetry/articles usually get published in various literary magazines. He has his own diction and style that has its own charm. मालिकज़ादा जावेद

mutmain khud se aur gila sabse

Malikzada Jawed is the son of eminet poet, orator, Malik Zada Manzoor. Jawed poetry/articles usually get published in various literary magazines. He has his own diction and style that has its own charm. मालिकज़ादा जावेद

मलिक ज़ादा जावेद

Malik Zada Javed performing at "shaam-e-sukhan", a nashist organized by Rekhta. मालिकज़ादा जावेद

मालिकज़ादा जावेद

मालिकज़ादा जावेद

अंधे गूँगे बहरे लोग

मालिकज़ादा जावेद

अंधेरों से मिरा रिश्ता बहुत है

मालिकज़ादा जावेद

एक जुगनू है मेरी मुट्ठी में

मालिकज़ादा जावेद

कर्ब चेहरों पे सजाते हुए मर जाते हैं

मालिकज़ादा जावेद

ऑडियो 4

अंधे गूँगे बहरे लोग

अंधेरों से मिरा रिश्ता बहुत है

एक जुगनू है मेरी मुट्ठी में

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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