Midhat-ul-Akhtar's Photo'

मिद्हत-उल-अख़्तर

1945 - | औरंगाबाद, भारत

ग़ज़ल 19

शेर 12

कूच करने की घड़ी है मगर हम-सफ़रो

हम उधर जा नहीं सकते जिधर सब गए हैं

जिस्म उस की गोद में हो रूह तेरे रू-ब-रू

फ़ाहिशा के गर्म बिस्तर पर रिया-कारी करूँ

  • शेयर कीजिए

तेरी औक़ात ही क्या 'मिदहत-उल-अख़्तर' सुन ले

शहर के शहर ज़मीनों के तले दब गए हैं

ई-पुस्तक 2

Charon Or

 

1968

Munafiqon Mein Roz-o-Shab

 

1980

 

संबंधित शायर

  • उबैद हारिस उबैद हारिस बेटा

"औरंगाबाद" के और शायर

  • अहसन यूसुफ़ ज़ई अहसन यूसुफ़ ज़ई
  • बशर नवाज़ बशर नवाज़
  • सिकंदर अली वज्द सिकंदर अली वज्द
  • इश्क़ औरंगाबादी इश्क़ औरंगाबादी
  • अब्दुर्रहीम नश्तर अब्दुर्रहीम नश्तर
  • क़मर इक़बाल क़मर इक़बाल
  • फ़ारूक़ शमीम फ़ारूक़ शमीम
  • क़ाज़ी सलीम क़ाज़ी सलीम
  • साबिर साबिर
  • सिराज औरंगाबादी सिराज औरंगाबादी

Added to your favorites

Removed from your favorites