मोहम्मद असलम का परिचय
पहचान: इतिहासकार, शोधकर्ता और वफ़ियात निगार (शोक-लेखक / प्रख्यात हस्तियों के निधन पर उनके जीवन का इतिहास लिखने वाले)
प्रोफ़ेसर मोहम्मद असलम 28 नवंबर 1932 को तहसील फ़िल्लौर, ज़िला जालंधर (ब्रिटिश भारत) में पैदा हुए। उनके वालिद का नाम तुफ़ैल मोहम्मद था। प्राथमिक शिक्षा से लेकर एम.ए. तक की पूरी शिक्षा उन्होंने लाहौर में हासिल की। उच्च शिक्षा के लिए वे 1958 में इंग्लैंड गए, जहाँ उन्होंने डरहम यूनिवर्सिटी से बी.ए. (ऑनर्स), मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से एम.ए. (फ़ारसी) और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से एम.लिट. की डिग्री हासिल की।
1967 में वे वतन वापस आए और पंजाब यूनिवर्सिटी (लाहौर) के इतिहास विभाग में बतौर लेक्चरर नियुक्त हुए। शिक्षण, शोध और शैक्षणिक सेवाओं के विभिन्न पड़ाव पार करते हुए वे इतिहास विभाग के प्रोफ़ेसर और विभागाध्यक्ष (एच.ओ.डी.) बने, और 27 नवंबर 1992 को इसी पद से सेवानिवृत्त (रिटायर) हुए। वे कुछ समय तक 'वेस्ट पाकिस्तान उर्दू एकेडमी' के सचिव (सेक्रेटरी) भी रहे।
प्रोफ़ेसर मोहम्मद असलम की गिनती पाकिस्तान के बेहतरीन इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों में होती है। उन्हें विशेष रूप से एक 'वफ़ियात निगार' के रूप में असाधारण प्रसिद्धि मिली। उन्होंने पाकिस्तान की महान शैक्षणिक, साहित्यिक, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों के जीवन और मृत व्यक्तियों पर प्रामाणिक शोध कार्य किया, जिसने इस क्षेत्र में एक नई परंपरा की नींव रखी।
उनकी प्रमुख पुस्तकों में 'वफ़ियात-ए-मशाहिर-ए-पाकिस्तान', 'ख़ुफ़्तगान-ए-कराची', 'ख़ुफ़्तगान-ए-ख़ाक-ए-लाहौर', 'वफ़ियात-ए-अयान-ए-पाकिस्तान', 'दीन-ए-इलाही और उसका पस-मंज़र', 'तारीख़ी मक़ालात', 'सर्माया-ए-उम्र', 'सलातीन-ए-देहली और शाहान-ए-मुग़लिया का ज़ौक़-ए-मूसिक़ी', 'सफ़रनामा-ए-हिंद', 'मलफ़ूज़ाती अदब की तारीख़ी अहमियत', 'मोहम्मद बिन क़ासिम और उसके जांनशीन' और 'मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी के सियासी मक्तूबात' (संपादन) शामिल हैं। उन्होंने फ़ारसी पुस्तक 'सुलूक अल-मुलूक' का अंग्रेज़ी अनुवाद "Muslim Conduct of State" के नाम से भी किया।
निधन: प्रोफ़ेसर मोहम्मद असलम का इंतकाल 6 अक्टूबर 1998 को लाहौर में हुआ।