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मुंशी अमीरुल्लाह तस्लीम

1819 - 1911 | लखनऊ, भारत

उत्तर-क्लासिकी शायर, अपने सर्वाधिक लोकप्रिय शेरों के लिए प्रसिद्ध

उत्तर-क्लासिकी शायर, अपने सर्वाधिक लोकप्रिय शेरों के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल

इक आफ़त-ए-जाँ है जो मुदावा मिरे दिल का

नोमान शौक़

गर यही है आदत-ए-तकरार हँसते बोलते

नोमान शौक़

चारासाज़-ए-ज़ख़्म-ए-दिल वक़्त-ए-रफ़ू रोने लगा

नोमान शौक़

चाहता हूँ पहले ख़ुद-बीनी से मौत आए मुझे

नोमान शौक़

थक गए तुम हसरत-ए-ज़ौक़-ए-शहादत कम नहीं

नोमान शौक़

पारसाई उन की जब याद आएगी

नोमान शौक़

फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ

नोमान शौक़

बढ़ गई मय पीने से दिल की तमन्ना और भी

नोमान शौक़

भूले से भी न जानिब-ए-अग़्यार देखना

नोमान शौक़

वस्ल में बिगड़े बने यार के अक्सर गेसू

नोमान शौक़

शमीम-ए-यार न जब तक चमन में छू आए

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI