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मुंशी ख़ुशवक़्त अली ख़ुर्शीद

मुंशी ख़ुशवक़्त अली ख़ुर्शीद के शेर

पीरी में वलवले वो कहाँ हैं शबाब के

इक धूप थी कि साथ गई आफ़्ताब के