Raghib Muradabadi's Photo'

राग़िब मुरादाबादी

1918 - 2011 | कराची, पाकिस्तान

जिसे कहते हो तुम इक क़तरा-ए-अश्क

मिरे दिल की मुकम्मल दास्ताँ है

हक़ीक़त को छुपाया हम से क्या क्या उस के मेक-अप ने

जिसे लैला समझ बैठे थे वो लैला की माँ निकली

ख़ुदा कातिब की सफ़्फ़ाकी से भी महफ़ूज़ फ़रमाए

अगर नुक़्ता उड़ा दे नाम-ज़द नामर्द हो जाए