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रईस फ़रोग़

1926 - 1982 | कराची, पाकिस्तान

नई ग़ज़ल के अग्रणी पाकिस्तानी शायरों में विख्यात।

नई ग़ज़ल के अग्रणी पाकिस्तानी शायरों में विख्यात।

ग़ज़ल

अपनी मिट्टी को सर-अफ़राज़ नहीं कर सकते

जावेद सबा

आँखें जिन को देख न पाएँ सपनों में बिखरा देना

जावेद सबा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI