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रज़ा अमरोहवी

1939 | अमरोहा, भारत

ग़ज़ल 3

 

शेर 1

महरूमियों का अपनी शिकवा हो क्यूँ हमें

कुछ लोग पी के ही नहीं छलका के आए हैं

for all my deprivations why shouldn't I

not only have some people sipped, they've also spilled the wine

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पुस्तकें 5

Qindeel

 

1987

Rang-o-Roshni

 

1967

Raqs-e-Nawa

 

1981

Shahr-e-Ghazalan

 

1985

Yadon Ki Khushbu

 

2012

 

"अमरोहा" के और शायर

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