ग़ज़ल 5

 

शेर 2

कोई मसरूफ़ियत होगी वगर्ना मस्लहत होगी

इस पैमाँ-फ़रामोशी से उस को बेवफ़ा कहना

सजा कर चार-सू रंगीं महल तेरे ख़यालों के

तिरी यादों की रानाई में ज़ेबाई में जीते हैं

 

पुस्तकें 1

Chashm-e-Sitara Shumar

 

1992

 

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