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साहिर भोपाली

1911

ग़ज़ल 1

 

शेर 2

तलातुम का एहसान क्यूँ हम उठाएँ

हमें डूबने को किनारा बहुत है

why should I take a favour, from the stormy sea

to sink the shoreside shallows do suffice for me

why should I take a favour, from the stormy sea

to sink the shoreside shallows do suffice for me

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वफ़ा तो कैसी जफ़ा भी नहीं है अब हम पर

अब इतना सख़्त मोहब्बत से इंतिक़ाम ले

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ई-पुस्तक 3

Sada-e-Dil

 

1959

Sada-e-Dil

 

1959

यद-ए-बैज़ा

 

1962

 

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