Salam Machhli shahri's Photo'

सलाम मछली शहरी

1921 - 1973

रूमानी लहजे के प्रसिद्ध लोकप्रिय शायर

रूमानी लहजे के प्रसिद्ध लोकप्रिय शायर

ग़ज़ल 18

शेर 19

यूँ ही आँखों में गए आँसू

जाइए आप कोई बात नहीं

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अब मा-हसल हयात का बस ये है 'सलाम'

सिगरेट जलाई शे'र कहे शादमाँ हुए

कभी कभी अर्ज़-ए-ग़म की ख़ातिर हम इक बहाना भी चाहते हैं

जब आँसुओं से भरी हों आँखें तो मुस्कुराना भी चाहते हैं

तुम शराब पी कर भी होश-मंद रहते हो

जाने क्यूँ मुझे ऐसी मय-कशी नहीं आई

काश तुम समझ सकतीं ज़िंदगी में शाएर की ऐसे दिन भी आते हैं

जब उसी के पर्वर्दा चाँद उस पे हँसते हैं फूल मुस्कुराते हैं

पुस्तकें 6

Intikhab-e-Kalam Salam Machhli Shahri

 

1965

इंतिख़ाब-ए-कलाम-ए-सलाम मछली शहरी

 

1991

Mere Naghme

 

 

Payal

 

1944

Salam Machhli Shahri: Shakhsiyat Aur Fan

 

1998

Wusatein

 

 

 

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