ग़ज़ल 11

शेर 2

बहुत क़रीब से कुछ भी देख पाओगे

कि देखने के लिए फ़ासला ज़रूरी है

सुकूत बढ़ने लगा है सदा ज़रूरी है

कि जैसे हब्स में ताज़ा हवा ज़रूरी है

 

"ख़ानेवाल" के और शायर

  • आइला ताहिर आइला ताहिर
  • अम्मार यासिर मिगसी अम्मार यासिर मिगसी
  • तासीर जाफ़री तासीर जाफ़री
  • कोमल जोया कोमल जोया
  • ज़र्रीं मुनव्वर ज़र्रीं मुनव्वर
  • राहील फ़ारूक़ राहील फ़ारूक़