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शेख़ क़ुद्रतुल्लाह क़ुदरत

1713 - 1790/91 | दिल्ली, भारत

रख आँसू से वस्ल की उम्मीद

खारे पानी से दाल गलती नहीं

छलकने लगे अश्क-ए-गुलगूँ मिज़ा से

फिर आई है फ़स्ल-ए-बहार गरेबाँ

गए वो दिन कि बहते थे पड़े नाले इन आँखों से

सर-ए-मिज़्गाँ तलक इक अश्क अब आता है मुश्किल से