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शकेब जलाली

1934 - 1966 | पाकिस्तान

प्रसिद्ध पाकिस्तानी शायर। कम उम्र में आत्म हत्या की

प्रसिद्ध पाकिस्तानी शायर। कम उम्र में आत्म हत्या की

ग़ज़ल

आ के पत्थर तो मिरे सहन में दो चार गिरे

नोमान शौक़

कोई इस दिल का हाल क्या जाने

नोमान शौक़

ख़मोशी बोल उठ्ठे हर नज़र पैग़ाम हो जाए

नोमान शौक़

गले मिला न कभी चाँद बख़्त ऐसा था

नोमान शौक़

जहाँ तलक भी ये सहरा दिखाई देता है

नोमान शौक़

दुनिया वालों ने चाहत का मुझ को सिला अनमोल दिया

नोमान शौक़

दश्त ओ सहरा अगर बसाए हैं

नोमान शौक़

नक़ाब-ए-रुख़ उठाया जा रहा है

नोमान शौक़

बद-क़िस्मती को ये भी गवारा न हो सका

नोमान शौक़

मौज-ए-सबा रवाँ हुई रक़्स-ए-जुनूँ भी चाहिए

नोमान शौक़

ये जल्वा-गाह-ए-नाज़ तमाशाइयों से है

नोमान शौक़

वहाँ की रौशनियों ने भी ज़ुल्म ढाए बहुत

नोमान शौक़

वही झुकी हुई बेलें वही दरीचा था

नोमान शौक़

वो सामने था फिर भी कहाँ सामना हुआ

नोमान शौक़

हम-जिंस अगर मिले न कोई आसमान पर

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI