Shamim Qasmi's Photo'

शमीम क़ासमी

1954 | सासाराम, भारत

शहर में अम्न-ओ-अमाँ हो ये ज़रूरी है मगर

हाकिम-ए-वक़त के माथे पे लिखा ही कुछ है

मूए ने मुँह की खाई फिर भी ये ज़ोर ज़ोरी

ये रेख़्ती है भाई तुम रेख़्ता तो जानो

घर में आसेब ज़लज़ले का है

इस लिए ख़ुद में ही सिमट के हैं