शिव नारायण आराम के शेर
ग़ज़ब है मुद्दई जो हो वही फिर मुद्दआ' ठहरे
जो अपना दुश्मन-ए-दिल हो वही दिल की दवा ठहरे
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere