सय्यद मोहम्मद मियाँ का परिचय
जन्म : 04 Oct 1903 | बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश
पहचान: इतिहासकार, जीवन-लेखक (जीवनीकार), स्वतंत्रता सेनानी, लेखक व शिक्षक, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नाज़िम और "मुअर्रिख़-ए-मिल्लत"
मौलाना सैयद मुहम्मद मियाँ देवबंदी भारतीय उपमहाद्वीप के उन प्रमुख विद्वानों में से थे, जिन्होंने ज्ञान और कर्म, इतिहास लेखन और जीवनी लेखन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सेवाएँ दीं। वे एक उच्च स्तर के इतिहासकार, गहरी दृष्टि वाले शोधकर्ता और प्रभावशाली लेखक थे, जिन्होंने इस्लामी इतिहास और आज़ादी की तहरीक के विभिन्न पहलुओं को प्रमाणिक और मजबूत ढंग से प्रस्तुत किया।
उनका जन्म 12 रजब 1321 हिजरी / 4 अक्टूबर 1903 को ज़िला बुलंदशहर में हुआ। उनके पिता सैयद मंज़ूर मुहम्मद नहर विभाग में कार्यरत थे। प्रारंभिक शिक्षा मुज़फ्फरनगर में प्राप्त की, उसके बाद 1912 से 1925 तक दारुल उलूम देवबंद में शिक्षा ग्रहण कर दीन की उच्च शिक्षा पूरी की। इस दौरान उन्होंने मौलाना मुहम्मद ऐज़ाज़ अली अमरोहवी, अल्लामा मुहम्मद इब्राहीम बलियावी और अल्लामा अनवर शाह कश्मीरी जैसे महान विद्वानों से शिक्षा प्राप्त की।
शिक्षा पूरी करने के बाद 1926 में मदरसा हनफिया शाहाबाद में अध्यापन शुरू किया, लेकिन सरकारी सहयोग के कारण उसे छोड़ दिया और बाद में मदरसा शाही मुरादाबाद में पढ़ाने लगे।
1929 में उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की आज़ादी की तहरीक और सिविल नाफरमानी आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। इस दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। 1945 में वे जमीयत के नाज़िम बने और दिल्ली में रहकर संगठनात्मक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्य किए। भागलपुर और भोपाल के दंगों के समय उनकी सेवाएँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
1963 में उन्होंने यह पद छोड़ दिया और फिर से शिक्षण कार्य शुरू किया। दिल्ली के मदरसा अमीनिया में हदीस की शिक्षा, फतवा और मार्गदर्शन का काम जीवन भर करते रहे।
उनकी लिखी कई किताबें पाठ्यक्रम में शामिल हैं, जैसे: "दिनी तालीम के रिसाले", "तारीख़-ए-इस्लाम", "हमारे पैगंबर", "रोज़ा व ज़कात" और "मिश्कातुल आसार"।
उनकी प्रमुख रचनाओं में "सीरत मुहम्मद रसूलुल्लाह", "हयात-ए-शैखुल इस्लाम", "असीरान-ए-माल्टा", "तहरीक शैखुल हिंद", "अहद-ए-ज़रीन", "जम्हूरियत अपने आईने में", "सालेह जम्हूरियत" और "सियासी व आर्थिक मसाइल और इस्लामी तालीमात" शामिल हैं।
उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब "उलमा-ए-हिंद का शानदार माज़ी" है, जो चार भागों में है। इसमें उन्होंने मुजद्दिद अल्फ़ सानी से लेकर 1857 की आज़ादी की लड़ाई तक के इतिहास को विस्तार से लिखा है। इस किताब को अंग्रेज़ी सरकार ने ज़ब्त कर लिया था और उन्हें जेल भी भेजा गया था।
उनकी लेखनी की विशेषता यह है कि वे केवल इतिहास नहीं बताते, बल्कि उसका विश्लेषण भी करते हैं और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
निधन: मौलाना सैयद मुहम्मद मियाँ देवबंदी का निधन 16 शव्वाल 1395 हिजरी / 22 अक्टूबर 1975 को दिल्ली में हुआ और वहीं उन्हें दफन किया गया।