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तनवीर सिप्रा

1932 - 1993 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 5

 

शेर 16

रात मुझे माँ की तरह गोद में ले ले

दिन भर की मशक़्क़त से बदन टूट रहा है

औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना

उस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है

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शायद यूँही सिमट सकें घर की ज़रूरतें

'तनवीर' माँ के हाथ में अपनी कमाई दे

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मिल मालिक के कुत्ते भी चर्बीले हैं

लेकिन मज़दूरों के चेहरे पीले हैं

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अब तक मिरे आ'साब पे मेहनत है मुसल्लत

अब तक मिरे कानों में मशीनों की सदा है

पुस्तकें 1

Lafz Khurdure

 

1980