वाजिदा तबस्सुम के उद्धरण
मोहब्बत करने वाले निडर हो जाते हैं, ख़ौफ़ का कोई जज़्बा उन्हें बांध नहीं सकता।
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औरत जब तक पर्दे में रहती है उसे क़दम-क़दम पर मर्द के सहारे की ज़रूरत महसूस होती है लेकिन जब वह पर्दे से बाहर आती है तो मर्द इसके लिए बे-मसरफ़ चीज़ बन कर रह जाता है।
(अफ़साना: नथ उतराई)
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