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वली मोहम्मद वली

1667 - 1725 | दक्कन, भारत

दिल्ली में उर्दू शायरी को स्थापित करने वाले क्लासिकी शायर

दिल्ली में उर्दू शायरी को स्थापित करने वाले क्लासिकी शायर

ग़ज़ल 40

शेर 22

छुपा हूँ मैं सदा-ए-बाँसुली में

कि ता जानूँ परी-रू की गली में

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जामा-ज़ेबों को क्यूँ तजूँ कि मुझे

घेर रखता है दौर दामन का

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हो क्यूँ शोर दिल की बाँसुली में

मलाहत का सलोना कान पहुँचा

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ई-पुस्तक 25

अाइना-ए-माना नुमा

वली औरंगाबादी: बाज़ हकाइक़

2003

दीवान-ए-वली

 

1921

दीवान-ए-वली

 

1878

दीवान-ए-वली

एक नायाब नुस्ख़ा

 

Deewan-e-Wali

 

 

Hindustani Adab Ke Memar: Wali

 

2006

Intikhab-e-Wali

 

1999

इंतिख़ाब-ए-वली

 

2008

Intikhab-e-Wali

 

1993

Intikhab-e-Wali

 

1991

वीडियो 5

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जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

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सोहबत-ए-ग़ैर मूं जाया न करो

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ऑडियो 8

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मत ग़ुस्से के शो'ले सूँ जलते कूँ जलाती जा

किया मुझ इश्क़ ने ज़ालिम कूँ आब आहिस्ता आहिस्ता

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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