अनीस अब्र

ग़ज़ल 10

शेर 8

मौत की आरज़ू में दीवाने

उम्र-भर ज़िंदगी से लड़ते हैं

लफ़्ज़ यूँ ख़ामुशी से लड़ते हैं

जिस तरह ग़म हँसी से लड़ते हैं

तुझ पे जमी हैं सब की नज़रें

तेरी नज़र में कौन रहेगा

मैं मुस्कुराता मगर दी अश्क ने मोहलत

ख़ुशी जब एक मिली साथ ग़म हज़ार मिले

आज इंसाँ को तपते सहरा में

बहता दरिया तलाश करना है

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