ग़ज़ल 10

शेर 4

मुझे पता है मोहब्बत में क्या गुज़रती है

सो तुझ से इश्क़ नहीं तुझ से दोस्ती करूँगा

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उस ने इस तरह से बदला है रवय्या अपना

पूछना पड़ता है हर वक़्त तुम्हीं हो ना दोस्त

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अँधेरे इस लिए रहते हैं साथ साथ मिरे

ये जानते हैं मैं इक रोज़ रौशनी करूँगा

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लोग जैसे भी हों पैरों के तले रखते हैं

इतना आसाँ नहीं होता है ज़मीन होना दोस्त

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चित्र शायरी 1

जैसा सोचो वैसा मतलब होता है हल्की बात का गहरा मतलब होता है चेहरा पढ़ कर देखोगे तो जानोगे ख़ामोशी का क्या क्या मतलब होता है हिजरत को तुम नक़्ल-ए-मकानी कहते हो हिजरत का मर जाना मतलब होता है अपनी बात मुकम्मल कर के जाओ तुम आधी बात का उल्टा मतलब होता है शहज़ादी है दुनिया मतलब वाली ये सब का अपना अपना मतलब होता है

 

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