Pallav Mishra's Photo'

पल्लव मिश्रा

1998 | दिल्ली, भारत

पल्लव मिश्रा

ग़ज़ल 11

शेर 13

मैं तुझ से मिलने समय से पहले पहुँच गया था

सो तेरे घर के क़रीब कर भटक रहा हूँ

  • शेयर कीजिए

ये तय हुआ था कि ख़ूब रोएँगे जब मिलेंगे

अब उस के शाने पे सर है तो हँसते जा रहे हैं

  • शेयर कीजिए

शहर-ए-जाँ में वबाओं का इक दौर था

मैं अदा-ए-तनफ़्फ़ुस में कमज़ोर था

तिरे लबों में मिरे यार ज़ाइक़ा नहीं है

हज़ार बोसे हैं उन पर इक दुआ नहीं है

  • शेयर कीजिए

वो नशा है के ज़बाँ अक़्ल से करती है फ़रेब

तू मिरी बात के मफ़्हूम पे जाता है कहाँ

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 1

Shumara Number-029

2018

 

चित्र शायरी 1

तुम्हारी दुनिया के बाहर अंदर भटक रहा हूँ मैं बा'द-ए-तर्क-ए-जहाँ यही पर भटक रहा हूँ मैं तुझ से मिलने समय से पहले पहुँच गया था सो तेरे घर के क़रीब आ के भटक रहा हूँ मैं एक ख़ाना-ब-दोश हूँ जिस का घर है दुनिया सो अपने काँधों पे ले के ये घर भटक रहा हूँ मैं हर क़दम पर सँभल सँभल कर भटकने वाला भटकने वालों से काफ़ी बेहतर भटक रहा हूँ

 

वीडियो 5

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

पल्लव मिश्रा

कुछ ऐसे दो-जहाँ से राब्ता रक्खा गया है

पल्लव मिश्रा

तुम्हारी दुनिया के बाहर अंदर भटक रहा हूँ

पल्लव मिश्रा

लहू में घुल घुल के बह रहे थे रगों के अंदर

पल्लव मिश्रा

वो बार-ए-फ़र्ज़-ए-तकल्लुफ मुझी को धोना पड़ा

पल्लव मिश्रा

संबंधित शायर

  • अब्दुर्रहमान मोमिन अब्दुर्रहमान मोमिन समकालीन
  • तरकश प्रदीप तरकश प्रदीप समकालीन
  • विपुल कुमार विपुल कुमार समकालीन
  • अज़हर नवाज़ अज़हर नवाज़ समकालीन
  • अभिनंदन पांडे अभिनंदन पांडे समकालीन
  • आलोक मिश्रा आलोक मिश्रा समकालीन
  • इनआम आज़मी इनआम आज़मी समकालीन
  • आक़िब साबिर आक़िब साबिर समकालीन

"दिल्ली" के और शायर

  • फ़रहत एहसास फ़रहत एहसास
  • शैख़  ज़हूरूद्दीन हातिम शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
  • मीर तक़ी मीर मीर तक़ी मीर
  • शाह नसीर शाह नसीर
  • हसरत मोहानी हसरत मोहानी
  • दाग़ देहलवी दाग़ देहलवी
  • आबरू शाह मुबारक आबरू शाह मुबारक
  • बेख़ुद देहलवी बेख़ुद देहलवी
  • राजेन्द्र मनचंदा बानी राजेन्द्र मनचंदा बानी
  • अनीसुर्रहमान अनीसुर्रहमान