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अब्दुर्रहमान मोमिन

1996 - | कराची, पाकिस्तान

पाकिस्तान के नौजवान शायर

पाकिस्तान के नौजवान शायर

ग़ज़ल 18

शेर 19

हिज्र का बाब ही काफ़ी था हमें

वस्ल का बाब नहीं देखा था

कफ़न की जेब भी ख़ाली नहीं है

ये बद-हाली है ख़ुश-हाली नहीं है

अभी से तुझ को पड़ी है विसाल की मिरी जाँ

अभी तो हिज्र ने उन्वान ही नहीं पाया

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