जो सुख के उजाले में था परछाईं हमारी

अब दुख के अँधेरे में वो साया नहीं देखा

ये समझ कर फ़क़ीरी ही में है ख़ुदा

गुन हमेशा फ़क़ीरों के गाते रहे