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ज़हीर ग़ाज़ीपुरी

1938 | हज़ारीबाग़, भारत

ग़ज़ल 6

शेर 5

काग़ज़ की नाव भी है खिलौने भी हैं बहुत

बचपन से फिर भी हाथ मिलाना मुहाल है

बम फटे लोग मरे ख़ून बहा शहर लुटे

और क्या लिक्खा है अख़बार में आगे पढ़िए

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ता-उम्र अपनी फ़िक्र रियाज़त के बावजूद

ख़ुद को किसी सज़ा से बचाना मुहाल है

ई-पुस्तक 7

Aashob-e-Nawa

 

1978

आशुब-ए-नवा

 

1978

Alfaz Ka Safar

 

1976

झारखण्ड और बिहार के अहम अहल-ए-क़लम

भाग-001

2009

सब्ज़ की मौसम सदा

 

1990

Taslees-e-Fun

 

1972

Urdu Dohe Ek Tanqeedi Jaeza

 

2005

 

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