Zulfiqar Aadil's Photo'

ज़ुल्फ़िक़ार आदिल

1972 | कराची, पाकिस्तान

नई पीढ़ी के प्रतिनिधि शायर और कहानीकार।

नई पीढ़ी के प्रतिनिधि शायर और कहानीकार।

ये किस ने हात पेशानी पे रक्खा

हमारी नींद पूरी हो गई है

वापस पलट रहे हैं अज़ल की तलाश में

मंसूख़ आप अपना लिखा कर रहे हैं हम

यूँ उठे इक दिन कि लोगों को हुआ

अब्र का धोका हमारी ख़ाक पर

दश्त-ओ-दरिया की इब्तिदा से हैं

हम वही तीन दिन के प्यासे हैं

रवानी में नज़र आता है जो भी

उसे तस्लीम कर लेते हैं पानी

बैठे बैठे इसी ग़ुबार के साथ

अब तो उड़ना भी गया है मुझे

'आदिल' सजे हुए हैं सभी ख़्वाब ख़्वान पर

और इंतिज़ार-ए-ख़ल्क़-ए-ख़ुदा कर रहे हैं हम