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ज़ुल्फ़िक़ार आदिल

1972 | कराची, पाकिस्तान

नई पीढ़ी के प्रतिनिधि शायर और कहानीकार।

नई पीढ़ी के प्रतिनिधि शायर और कहानीकार।

ज़ुल्फ़िक़ार आदिल

ग़ज़ल 27

शेर 7

वापस पलट रहे हैं अज़ल की तलाश में

मंसूख़ आप अपना लिखा कर रहे हैं हम

ये किस ने हात पेशानी पे रक्खा

हमारी नींद पूरी हो गई है

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बैठे बैठे इसी ग़ुबार के साथ

अब तो उड़ना भी गया है मुझे

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यूँ उठे इक दिन कि लोगों को हुआ

अब्र का धोका हमारी ख़ाक पर

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दश्त-ओ-दरिया की इब्तिदा से हैं

हम वही तीन दिन के प्यासे हैं

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI