aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
| Author: | Shahryar |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | Rekhta Publications |
| Binding: | Paperback (0 pg) |
| Year: | 2023 (1st Edition) |
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About the Author- "शहरयार उर्दू के अग्रणी आधुनिक शायरों में शामिल हैं और बतौर गीतकार , 'फ़िल्म उमराव जान', के गीतों के लिए मशहूर हैं। शहरयार अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिन्द) अलीगढ़ में लिटरेरी सहायक भी रहे और अंजुमन की पत्रिकाओं 'उर्दू दब' और 'हमारी ज़बान' के संपादक के तौर पर भी काम किया। उनकी किताब 'ख़्वाब के दर बंद हैं ' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी अवार्ड से भी नवाज़ा गया। शहरयार साहब फ़िराक़ गोरखपुरी, कुर्रतुलऐन हैदर, और अली सरदार जाफ़री के बाद चौथे ऐसे उर्दू साहित्यकार हैं जिन्हे ज्ञानपीठ सम्मान भी मिला। उर्दू शायरी में अहम भूमिका निभाने के लिए उन्हें और भी कई ख़िताब दिए गए हैं जिनमें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार, फ़िराक़ सम्मान, और दिल्ली उर्दू पुरस्कार प्रमुख हैं। संग-ए-मील पब्लिकेशंस, पाकिस्तान से उनका कुल्लियात प्रकाशित हुआ जिसमें उनकी शायरी के छ: संग्रह शामिल हैं । यही कुल्लियात 'सूरज को निकलता देखूँ' के नाम से भारत से भी प्रकाशित हो चुका है। उनके कलाम का अनुवाद फ्रेंच, जर्मन, रूसी, मराठी, बंगाली और तेलगू में हो चुका है। "
About the Book- शहरयार ने अपनी शायरी में जिस सादगी के साथ आज के इंसान की तकलीफ़ और दुःख-दर्द का बयान किया है वो अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने उर्दू शायरी के क्लासिकी रंग को बरक़रार रखते हुए जिस तरह आधुनिक वक़्त की समस्याओं का चित्रण अपनी शायरी में किया है वो क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। प्रस्तुत किताब में नुमाइन्दा शायर शहरयार की कुल्लियात से उनकी चुनिन्दा ग़ज़लों, नज़्मों और फ़िल्मी नग़मों को शामिल किया गया है। यह किताब देवनागरी लिपि में आ रही है और इसका संकलन फ़रीदून शहरयार ने किया है। नई नस्ल के पाठकों को ये किताब काफ़ी पसंद आने वाली है।
About the Compiler- "फ़रीदून शहरयार एक मशहूर सहाफ़ी हैं जिन्हें हिन्दुस्तान और कई दूसरे मुल्कों में ग़ैर-मामूली काम के लिए इज़्ज़त बख़्शी गई है। बॉलीवुड और हॉलीवुड के Actors / Actresses के साथ उनके वीडियो इंटरव्यूज़ दुनिया भर में बहुत पसन्द किए जाते हैं। एमिरेट्स एयरवेज़ और ओमान एयरवेज़ में भी उनके इंटरव्यूज़ देखे जा सकते हैं। फ़रीदून एक शायर भी हैं। उनका अंग्रेज़ी का पहला काव्य संग्रह ‘Dust of Sadness’ बेहद पसन्द किया गया है। शहरयार के साहबज़ादे हैं और विर्से में मिली हुनर की दौलत तक़सीम करते रहते हैं। फ़रीदून की उर्दू शायरी आज के दौर की नायाब तख़्लीक़ी आवाज़ों में से एक है।"