aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
| Author: | Dheerendra Singh Fayyaz |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | Rekhta Publications |
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Abount the Book:
‘मैं उर्दू हूँ’ एक भाषा के सफ़र का संस्मरण है। ये किताब उर्दू के प्रारम्भिक युग से शुरू होती है और मीर-ओ-ग़लिब से लेकर आधुनिक युग के नामचीन साहित्यकारों की उँगली थामे उस जगह तक जा पहुँचती है, जहाँ प्राचीन भाषाओं और लिपियों का ज़िक्र स्वाभाविक हो जाता है। इस संस्मरण में धीरे-धीरे ये भेद भी खुलता है कि सभी भाषाओं में कुछ न कुछ साम्य है और प्रत्यक्ष रूप से असंबद्ध लगने वाली देवनागरी, फ़ारसी और अरबी लिपियाँ दर-अस्ल एक ही मूल से निकली हैं। ये किताब लेखक और उर्दू के बीच होने वाला एक रोचक वार्तालाप है जो भाषाओं की व्युत्पत्ति, विकास और प्रसार के विषयों पर रौशनी डालता है।
Abount the Author:
धीरेन्द्र सिंह फ़ैयाज़ ज़बान और अदब के एक संजीदा क़ारी और शायर हैं। पढ़ने-पढ़ाने की अपनी बेहतरीन सलाहियत के बाइस साहित्य के समकालीन परिदृश्य में अपने पाठकों और शागिर्दों के दर्मियान वो बेहद सम्मानित हैं। उनका जन्म 10 जुलाई, 1987 में खजुराहो के नज़दीक चन्दला नाम के एक क़स्बे में हुआ। वो इन दिनों मुस्तक़िल तौर पर इंदौर में रहते हैं।